कहानी के इस भाग को पढ़ने से पहले इसका पहलादूसरा भाग पढ़ लें।

वह अभी भी अन्दर से काफ़ी गीला महसूस कर रही थी और अपनी पैंटी बदल चुकी थी जो फ़िर से गीली होने लगी थी। उसने अपनी काम रस में भीगी पैंटी पानी में भिगा दी थी ताकि उसके पति को इसकी कोई भनक या महक न लगे। उसे अभी भी यह यकीन नहीं हो रहा था कि अपनी शादी के सिर्फ़ छः महीने बाद ही उसका एक नौजवान दर्जी से विवाहेत्तर सम्बन्ध स्थापित होने जा रहा है। इन छः महीनों में उसके पति ने उसके शरीर का भरपूर भोग किया था और उसकी हर कामाग्नि को बुझाया था। शायद इस अन्तराल में एक भी दिन ऐसा नहीं बीता था जब दोनों ने सम्भोग न किया हो। दरअसल उसके मेरे प्रति आकर्षण के पीछे उसका दिनभर घर पर अकेले रहना एक बड़ा कारण था। उसके मन में मेरे लिये प्यार जैसी भावनाएँ पनपने लगीं थी। इसके साथ ही उसके मन में कहीं न कहीं अपने इस कुकृत्य के लिये आत्मग्लानि की भावना भी आ रही थी और वह अपने शरीर को अपने पति को समर्पित करके इसका आंशिक पश्चाताप करना चाहती थी। अतः उसने अपने पति के साथ कामक्रीड़ा करने का निर्णय लिया और सोचा कि इससे उसकी पहले से ही गरम और गीली योनि को भी तृप्ति मिल जायेगी। इसलिये उसने जाकर अपने पति को पीछे से पकड़ लिया और आहें भरते हुये सहलाने लगी। उसके स्तन उसके पति के शरीर से स्पर्श कर रहे थे। उसके पति को उसकी इस पहल से सुखद आनन्द की प्राप्ति हुयी साथ ही आश्चर्य भी हुआ पर वह अपने काम में मशगूल रहा यद्यपि अबतक उसका लिंग में तनाव महसूस होने लगा था। ज्योति उसके सीनों का मसाज़ करते हुये धीरे धीरे अपना हाथ नीचे ले गयी और उसके लिंग में आये तनाव का अनुभव किया। उसने अपनी आँखें बन्द कर रखीं थीं पर वह अपने ख्यालों से मुझे नही निकाल पा रही थी और अपने पति को अपनी बाहों में लेकर भी मेरे बारे में ही सोच रही थी। उसे अपनी योनि में फ़िर से सरसराहट महसूस होने लगी थी इस लिये वह अपने पति के पिछवाड़ों पर अपनी योनि को रखकर दबाते हुये हिलाने लगी। उसके ख्यालों मे तभी दखल पड़ा जब उसके पति ने पीछे मुड़कर अपनी बाहों में ले लिया और उसके होठों को चूसने लगा। ज्योति ने भी अपनी आँखें बन्द करके अपना शरीर अपने पति के हाथों में ढीला छोड़ दिया। राम (उसका पति) उसके नितम्बों को दोनों हाथों से दबाने लगा और उसका लिंग ज्योति की मेरे द्वारा उत्तेजित की गयी योनि से टकरा रहा था। ज्योति बुरी तरह से चाहती थी कि उसकी योनि में कोई प्रवेश करे इसलिये वो बोली “राम, ऊ… ऊ… ओह, मैं अब और इन्तज़ार नहीं कर सकती, प्लीज़… तुम मेरी योनि की आग बुझाओ”। राम को उसकी बात सुन कर आश्चर्य हुआ क्योंकि सामान्यतया ज्योति प्रणय निवेदन की पहल नहीं करती थी, पर क्योंकि उसे यह अच्छा लगा इसलिये उसने इसका कोई और मतलब निकालने की कोशिश नहीं की।

उसने ज्योति को अपने से अलग करके उसका पल्लू हटाया और काले ब्लाउज़ में लिपटे हुये उसके भरेपूरे स्तनों को निहारने लगा। ज्योति भी लज्जा वश सिर झुका कर अपने वक्षों को देखने लगी जोकि उसकी गहरी साँसों की वजह से तेजी से ऊपर नीचे हो रहे थे। राम दोनों हाथों से उसके स्तनों को दबाने लगा। ज्योति ने कामोत्तेजित होकर अपने होंठों को काटा और आँखें बन्द करके फ़िर से मेरे बारे सोचने लगी। कामोत्तेजना में उसकी हालत बुरी थी और उसकी योनि से कामरस लगभग बरस रहा था। राम ने उसके ब्लाउज़ का हुक खोलना शुरू किया और हर एक हुक खोलने के साथ ही वह अपनी उँगलियों को उसकी क्लीवेज में डालने लगा और उसके स्तनों हल्का सा दबाते हुये अगले हुक पर बढ़ने लगा। अब उसके ब्लाउज़ के सारे हुक खुल चुके थे और सफ़ेद ब्रा में लिपटे उसके स्तन राम पर गज़ब ढा रहे थे। ज्योति ने अपनी आँखें अभी भी बन्द की हुयी थीं। राम ब्रा के ऊपर से ही उसके स्तनों को दबाता हुआ बोला “ज्योति तुम्हारी क्लीविज इतनी कामुक और आमन्त्रित करने वाली है इसीलिये मैं चाहता हूँ कि तुम कभी गहरे गले का ब्लाउज़ पहन कर इसे सबको न दिखाओ”। ज्योति हर पल का आनन्द उठा रही थी पर साथ ही चिन्तित भी हो रही थी क्योंकि उसका मेरे द्वारा सिला हुआ नया ब्लाउज़ उसकी क्लीवेज दिखाता था। पर फ़िलहाल वह इस बात को नज़रअंदाज़ करके राम के साथ (ख्यालों में मेरे साथ) रति क्रीड़ा का आनन्द उठाने लगी। क्योंकि राम की बातें उसे मेरे बारे मे सोचने से विचलित कर रही थीं इसलिये उसने शरारती मुसकान के साथ राम से बोला “मेरे प्यारे राम, काम ज़्यादा करो और बातें कम” और आँखें बन्द करके फ़िर से पैंट के ऊपर से उसके लिंग को महसूस करने लगी। राम उसकी इस साहसिक बात से पुनः आश्चर्यचकित हुआ पर वह इससे इतना कामोत्तेजित हो रहा था कि उसने इसका कोई और मतलब निकालने की जहमत नहीं उठाई। वास्तव में अपनी पत्नी में आये इस नये बदलाव से वह काफ़ी प्रसन्न और उत्साहित था। अब उसने उसके स्तनों को दबाते हुये उसकी साड़ी उतारनी शुरू की। जैसे ही पूरी साड़ी जमीन पर गिरी उसने ज्योति के पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया। अब उसके सामने ज्योति बड़ी ही कामुक दशा में खुले ब्लाउज़, ब्रा और पैंटी में खड़ी थी। उसकी योनि का उभार उसकी पैंटी के ऊपर भी साफ़ दिख रहा था। राम ने उसकी योनि पर जैसे ही हाथ रखा वह जोरों से साँस लेते हुये कँपकँपी के साथ उससे चिपक गयी।

उसने देखा कि सिर्फ़ स्तन और नितम्ब को दबाने भर से ही उसकी योनि से एक बार कामरस विसर्जित हो चुका है उसे काफ़ी हैरत हुयी यह देखकर कि बस इतने से ही वह एक बार (दरअसल दूसरी बार, पहली बार १५ मिनट पूर्व मैने उसे कामोन्माद का अनुभव दिया था) स्खलित हो चुकी थी। पर उसे लगा कि यह सब उसके कामोत्तेजक स्पर्श की वजह से सम्भव हुआ और इसमे गौरवान्वित महसूस करने लगा। बेचारा राम! वह उसके नितम्बों और पैंटी में लिपटी बहती योनि की मसाज़ करता रहा। ज्योति बिना राम के लिंग के प्रवेश के ही अपने दूसरे स्खलन का आनन्द उठा रही थी। अब राम भी पूरी तरह उत्तेजित हो गया था और उसका लिंग पत्थर की भाँति कड़ा हो गया था। वह भी अपने लिंग को ज्योति की योनि पर कपड़ों के ऊपर से ही रगड़ कर चरम सीमा पर पहुँचने हि वाला था कि दरवाजे पर घंटी बजी। शाम की पार्टी में शामिल होने राम की बहन अल्पना अपने परिवार के साथ आयी थी। दोनों को अपनी अधूरी कामक्रीड़ा को मजबूरन भूलना पड़ा। ज्योति को अभी भी अपनी योनि के पास चिपचिपाहट महसूस हो रही थी और वह मेरे और मेरे स्पर्श के बारे में सोच रही थी। उसकी पैंटी उसकी योनि से चिपकने की वजह से वह थोड़ा अजीब से चल रही थी। इसे देखकर अल्पना ने मुस्कुराते हुये बोला “ज्योति, लगता है भैया की रात की हरकतों की वजह से तुम्हें वहाँ पर दुःख रहा है”। ज्योति ने झेंपते हुये बोला “नहीं ऐसी कोई बात नहीं है” और सम्भल कर चलने लगी। अल्पना का पति आनन्द भी ज्योति का बहुत बड़ा दीवाना था और मौका पाकर चोरी छिपे उसे निहारता रहता था। ज्योति को भी आनन्द की ये हरकतें अच्छी लगती थीं।

शाम ठीक पाँच बजे मैं ज्योति के घर उसका ब्लाउज़ देने पहुँच गया। वह मेरा ही इन्तज़ार कर रही थी। उसने कसी हुयी जीन्स और टीशर्ट पहन रखी थी जिसकी वजह से उसके बदन के सभी उभार बहुत खूबसूरती के साथ उजागर हो रहे थे। सभी लोग अन्दर बैठे थे, ज्योति दरवाज़ा खोलने के लिये आयी। वह जैसे जैसे आगे बढ़ रही थी उसकी योनि में कुलबुली हो रही थी। जैसे ही उसने दरवाज़ा खोला मैने मुस्कुराते हुये उसे आँख मारी। फ़िर कसे हुये कपड़ों में लिपटे उसके बदन को ऊपर से नीचे तक निहारने लगा। वह शर्माते हुये नीचे देख रही थी परन्तु अन्दर ही अन्दर उसे मज़ा आ रहा था और वह उत्तेजित हो रही थी। फ़िर उसने चुप्पी तोड़ते हुये बोला “मास्टर जी अन्दर आ जाइये, मैं ब्लाउज़ पहन के देख लेती हूँ कि और तो कोई कमी नहीं है दूर करने के लिये”। मैनें उससे इशारों में पूछा कि घार के बाकी लोग कहाँ हैं, उसने भी इशारों में बताया कि सभी अन्दर कमरे में हैं। जब वह अन्दर जाने के लिये पीछे मुड़ी तो मैं भी उसके पीछे हो लिया और एक बर पीछे से उसके नितम्बों पर हाथ फ़ेर दिया। वह थोड़ा सहम गयी और दौड़ कर ब्लाउज़ पहनने अन्दर कमरे में चली गयी। मैं उसके कमरे के बाहर ही खड़ा रहा। करीब दो मिनट बाद उसने दरवाज़ा खोला पर अन्दर ही रही। जीन्स और काले ब्लाउज़ मे वह गजब की कामुक लग रही थी। काले ब्लाउज़ में लिपटे उसके उरोज़ और उसमें से दिख रही उसकी क्लीवेज बहुत ही खूबसूरत लग रहे थे। उसे देखकर मैं बेहोशी में उसके कमरे की तरफ़ बढ़ने लगा पर झट से उसने दरवाज़ा बन्द कर लिया। फ़िर अपने साधारण कपड़े (जीन्स और टीशर्ट) पहन कर वह बाहर आयी शर्मा कर नीचे देखते हुये बोली “मास्टर जी ब्लाउज़ ठीक है”। मैं बड़े की कामुक अन्दाज़ में उसके पूरे बदन को घूर रहा था और अभी तुरन्त उसे अपनी बाहों मे लेकर उसके साथ संभोग करना चाहता था पर मुझे पता था कि यह सम्भव नहीं है। मैं कामाग्नि में जल रहा था और ज्योति इसका आनन्द लेते हुये मुझे छेड़ने के उद्देश्य से बोली “मास्टर जी क्या आपको प्यास लग रही है, आप कुछ पीना पसन्द करेंगे?” मैने अपने होंठों को चाटते हुये उसके स्तनों को देखा और बोला “हाँ, ताज़ा दूध मिलेगा क्या?” वह झेंप गयी पर सम्भलते हुये बोली “ठीक है मैं आपके लिये पानी लेकर आती हूँ”। वह मेरी आँखों में उसके प्रति वासना को देखकर खुश हो रही थी। उसे लग रहा था कि अब दिन के समय में उसकी शारीरिक इच्छाओं की पूर्ति के लिये अच्छा इन्तजाम हो गया है। वह ये सब इतनी चतुरता से करना जानती थी कि उसके पति को इसकी भनक न लगे।

वह अपने हाथ में पानी का गिलास ले कर लौटी और मुझे देने के लिये मेरे पास आयी। गिलास लेते समय मैने उसके हाथों को प्यार से सहला दिया। मैं उसके बदन को बड़ी कामुकता से निहारते हुये धीरे धीरे पानी पीने लगा। वह मुस्कुराते हुये इसका आनन्द उठा रही थी और इस बार बिना शर्माये हुये मेरी आँखों को उसके उरोजों और जांघों को निहारते हुये देख रही थी। जब मेरे और ज्योति के बीच यह सब चल रहा था तभी अचानक अल्पना कमरे में आ गयी। उसे देखकर हम दोनों सामान्य हो गये। अल्पना को देखकर मैं उसके प्रति सम्मोहित होने लगा। वह भी ज्योति के समान ही सुन्दर और कामुक थी पर उसका रंग थोड़ा साँवला था। तभी ज्योति ने बोला “दीदी ये मेरा दर्जी है, बाबू”। अल्पना मुझे देखकर थोड़ा मुस्कुराई और मैं नादान बनने की कोशिश करता हुआ वापस मुस्कुराते हुये नीचे देखने लगा। अल्पना बोली “ज्योति मैं पहले तुम्हारे कपड़े देखूँगी कि इसने कैसे सिले हैं अगर मुझे पसंद आते हैं तो मैं भी अपने ब्लाउज़ और सूट इसी से सिलवाउंगी”। यह सुनकर मेरी तो बाँछें खिल गयीं पर अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखते हुये मैने एकदम सामान्य दिखने का प्रयास किया और वहाँ से लौट आया।

तीसरा काला ब्लाउज़

पार्टी के दौरान सभी पुरुषों की नज़र ज्योति पर थी, वह काले कपड़ों में सभी पर कहर ढा रही थी। झीनी शिफ़ान की साड़ी से उसका गोरा बदन दिख रहा था। उसमे से उसकी क्लीवेज भी दिख रही थी। जब भी उसका पति राम उसे देखता था तो वह सावधानी पूर्वक उसे छुपाने की कोशिश करती थी पर उसे पूरा यकीन नहीं था कि वह राम की नज़रों से बच पायेगी। खासकर आनन्द ज्योति के आसपास ही रहने की कोशिश कर रहा था और मौका मिलते ही उसके बदन को यहाँ वहाँ छू लेता था। वह मेरे द्वारा किये गये उसके शरीर के नेत्रपान और मर्दन के बारे में सोचते हुये उसका आनन्द उठा रही थी। जब तक पार्टी समाप्त हुई सभी लोग थक चुके थे और राम ज्योति के बदन की आग को बिना बुझाये ही सो गया। राम खर्राटे मार कर सो रहा था जबकि ज्योति अभी भी अपने पार्टी के कपड़ों में ही थी। तभी मैने उसे एक एस एम एस भेजा “थिंक आफ़ मी व्हाइल गिविंग इट तो योअर हसबैंड (उसको अपनी देते समय मेरे बारे मे सोचना)”। उसका तुरन्त जवाब आया “वो तो पहले ही सो गये हैं, जितनी जल्दी हो सके मुझसे फ़ोन पर बात करो”। फ़िर उसने दूसरे कमरे में जाकर उसे अन्दर से बन्द कर लिया और बिस्तर पर लेटकर मेरे फ़ोन का इन्तजार करने लगी। जैसे ही फ़ोन बजा वह उसे तुरन्त उठाकर बोली “हाय बाबू”। मैने कहा “रानी, मेरी बहुत याद आ रही है क्या?” उसने केवल “हूम” बोला और अपनी योनि पर हाथ रख कर घर्षण करने लगी। मैने कहा “ठीक है मैं तुम्हें स्खलित होने में मदद करता हूँ”।

मुझसे बातें करते हुये उसने अपने सारे कपड़े उतार दिये। अब वह पूरी तरह से नंगी अपने बिस्तर पर लेटी हुयी थी। उसके एक हाथ में उसका फ़ोन था तो दूसरे हाथ में उसका स्त्रीत्व। उसने अपनी योनि को मसलना जारी रखा और मैं उसे अपने बारे मे याद दिलाकर उसे शीघ्र ही स्खलित होने में मदद करने लगा। उसके हस्तमैथुन के बाद जैसे ही योनि रस बाहर निकला वह भारी साँसों के साथ बोली “बाबू, मै तुमसे कल मिलती हूँ”। मुझे पता था कि ये कामुक गुड़िया मेरी कामुक रखैल बनने को तैयार है। मैं भी हस्तमैथुन से खुद को स्खलित करके सो गया।

(क्रमश: …)

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